US Immigration Reforms 2026: H1B, Green Card, OPT/CPT में बड़े बदलाव — भारतीय Students पर असर
अमेरिका में पढ़ाई और करियर बनाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए 2026 एक अहम साल साबित हो रहा है। अमेरिकी सरकार ने H-1B वीजा, ग्रीन कार्ड, OPT/CPT और H-4 वर्क परमिट से जुड़े कई बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। चूंकि भारतीय, H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी समूह हैं, इसलिए ये बदलाव सीधे तौर पर लाखों भारतीय छात्रों और IT प्रोफेशनल्स को प्रभावित कर सकते हैं।
Duration of Status (D/S) खत्म करने का प्रस्ताव
5 मई 2026 को अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने F-1 स्टूडेंट वीजा के लिए मौजूदा "Duration of Status" व्यवस्था को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा। मौजूदा सिस्टम में छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने तक बिना किसी फिक्स्ड डेडलाइन के अमेरिका में रह सकते हैं। नए प्रस्ताव के तहत:
- छात्रों को अधिकतम 4 साल की एक तय अवधि के लिए ही एडमिशन मिलेगा
- इसके बाद किसी भी एक्सटेंशन के लिए USCIS की औपचारिक मंजूरी जरूरी होगी
- पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाला ग्रेस पीरियड 60 दिन से घटाकर 30 दिन किया जा सकता है
OPT और CPT पर सीधा असर
OPT (Optional Practical Training) और CPT (Curricular Practical Training) वो प्रोग्राम हैं जिनके जरिए इंटरनेशनल छात्र पढ़ाई के दौरान या बाद में अमेरिका में काम करने का अनुभव हासिल करते हैं। इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित नियमों के लागू होने के बाद छात्रों को इन प्रोग्राम्स के लिए भी बार-बार औपचारिक USCIS प्रक्रिया से गुजरना होगा, जबकि अभी तक यूनिवर्सिटी के जरिए यह प्रक्रिया काफी आसान थी।
विशेष रूप से "Day 1 CPT" प्रोग्राम, जिसका इस्तेमाल कई ग्रेजुएट्स H-1B लॉटरी में असफल होने के बाद वर्क ऑथराइजेशन बनाए रखने के लिए करते हैं, वह भी काफी सीमित हो सकता है।
H-1B वीजा में प्रस्तावित बदलाव
| बदलाव | विवरण |
|---|---|
| Eligibility | यूनिवर्सिटी/रिसर्च संस्थानों के लिए मिलने वाली छूट कम की जा सकती हैं |
| Third-Party Deployment | क्लाइंट लोकेशन पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सख्त अनुपालन नियम |
| Employer Obligations | असली Employer-Employee Relationship साबित करना और विस्तृत दस्तावेज जमा करना अनिवार्य |
| Special Fee | कुछ नई H-1B फाइलिंग्स पर लागू फीस का दायरा बढ़ाया जा सकता है |
भारतीय आउटसोर्सिंग और IT कंसल्टिंग फर्मों को इन बदलावों से सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि 71-74% H-1B वीजा भारतीय नागरिकों को ही मिलते हैं।
Employment-Based Green Card में बदलाव
- एंट्री-लेवल वेज बेंचमार्क को 17वें पर्सेंटाइल से बढ़ाकर 34वें पर्सेंटाइल करने का प्रस्ताव है
- इसका मतलब है कि नियोक्ताओं (Employers) को अब ज्यादा सैलरी ऑफर करनी होगी
- इससे स्पॉन्सरशिप की लागत बढ़ेगी, जिससे छोटी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से बच सकती हैं
- एंट्री-लेवल विदेशी प्रोफेशनल्स की हायरिंग में कमी आने की आशंका है
H-4 EAD (H-1B Spouse Work Permit) पर असर
अभी तक H-1B धारकों के जीवनसाथी (H-4 वीजा पर) को उनके Employment Authorization Document (EAD) की रिन्यूअल पेंडिंग रहने पर भी ऑटोमैटिक एक्सटेंशन मिल जाता था। नए प्रस्ताव के तहत यह ऑटोमैटिक एक्सटेंशन खत्म किया जा सकता है, जिससे प्रोसेसिंग में देरी होने पर अस्थायी रूप से वर्क ऑथराइजेशन और आय बाधित हो सकती है।
भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए इसका क्या मतलब है?
- अमेरिका में पढ़ाई के बाद जॉब मिलना ज्यादा मुश्किल हो सकता है, खासकर AI, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे फील्ड में
- भारतीय IT कंसल्टिंग और कंपनियों के लिए अनुपालन लागत (Compliance Cost) बढ़ सकती है
- स्किल्ड भारतीय प्रोफेशनल्स कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, UK और जर्मनी जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं
- स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में रहना और अपनी स्थिति मैनेज करना पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो सकता है
महत्वपूर्ण बात
ये सभी बदलाव अभी सिर्फ प्रस्ताव (Proposed Rules) हैं और आधिकारिक रूप से लागू नहीं हुए हैं। H-1B रिफॉर्म रूल को अगस्त 2026 के आसपास प्रकाशित किए जाने की उम्मीद है। इसलिए छात्रों और प्रोफेशनल्स को घबराने की बजाय स्थिति पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
छात्रों के लिए सलाह
- सिर्फ H-1B लॉटरी या Day 1 CPT पर निर्भर रहने की बजाय कई विकल्प तैयार रखें
- STEM और स्पेशलाइज्ड फील्ड चुनते समय भविष्य की वीजा नीतियों को भी ध्यान में रखें
- किसी भी बड़े फैसले (जैसे एडमिशन या जॉब ऑफर स्वीकार करना) से पहले किसी योग्य इमिग्रेशन एक्सपर्ट से सलाह लें
- आधिकारिक अपडेट के लिए uscis.gov और travel.state.gov को नियमित रूप से चेक करते रहें
FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. US Immigration Reforms 2026 भारतीय छात्रों को क्यों सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं?
क्योंकि भारतीयों को हर साल 71-74% H-1B वीजा मिलते हैं, इसलिए बदलावों का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर पड़ेगा।
Q2. Duration of Status (D/S) खत्म होने से F-1 छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
छात्रों को अधिकतम 4 साल की तय अवधि मिलेगी, आगे एक्सटेंशन के लिए USCIS मंजूरी जरूरी होगी, ग्रेस पीरियड भी घट सकता है।
Q3. OPT और CPT प्रोग्राम पर इन बदलावों का क्या असर होगा?
बार-बार औपचारिक USCIS प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, Day 1 CPT प्रोग्राम काफी सीमित हो सकता है।
Q4. Employment-Based Green Card में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
एंट्री-लेवल वेज बेंचमार्क 17वें से 34वें पर्सेंटाइल तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे स्पॉन्सरशिप महंगी होगी।
Q5. क्या ये सभी बदलाव अभी लागू हो चुके हैं?
नहीं, ये अभी सिर्फ प्रस्ताव हैं। H-1B रिफॉर्म रूल अगस्त 2026 के आसपास प्रकाशित होने की उम्मीद है।
नोट: यह जानकारी वर्तमान में प्रस्तावित नियमों पर आधारित है, जो अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं। कृपया अंतिम निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि जरूर करें।
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