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HPSC Recruitment Controversy: युवाओं का विरोध, 35% और 50% न्यूनतम अंक मानदंड पर सवाल

ShikshaNews24: 5 जनवरी। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा हाल की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं, विशेष रूप से पीजीटी (स्नातकोत्तर शिक्षक) पदों के लिए, अनिवार्य किए गए 35% (आरक्षित वर्ग) और 50% (सामान्य वर्ग) के न्यूनतम अर्हक अंकों के मानदंड को लेकर प्रदेश के युवाओं और अभ्यर्थियों में भारी रोष है। अभ्यर्थियों का मुख्य आरोप है कि आयोग द्वारा जानबूझकर परीक्षा के प्रश्न-पत्रों को अत्यंत कठिन और कई बार पाठ्यक्रम से बाहर का रखा जा रहा है, ताकि अधिकांश उम्मीदवार इस कठोर कट-ऑफ को पार न कर सकें।

विवाद की जड़: 'अयोग्य घोषित करने की सोची-समझी रणनीति' का आरोप

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी और उनके प्रतिनिधि मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कर रहे हैं कि उनका आपत्ति का मुद्दा सिर्फ 35% या 50% का कट-ऑफ होना नहीं है, बल्कि इस मानदंड को लागू करने के पीछे की 'मंशा' है। उनका दावा है कि हाल में आयोजित PGT और अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में एक तय पैटर्न देखने को मिला है, जिसमें कई प्रश्न स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम से इतर या फिर अप्रासंगिक क्षेत्रों से पूछे गए थे।

उनका कहना है कि जब पेपर ही इतना कठिन हो कि एक औसत मेहनती छात्र भी न्यूनतम अंक हासिल न कर सके, तो ऐसे मानदंड का औचित्य संदिग्ध हो जाता है। उन्हें आशंका है कि यह एक व्यवस्थित तरीका है ताकि बड़ी संख्या में आवेदन आने के बावजूद, अधिकांश उम्मीदवारों को प्रारंभिक चरण में ही बाहर कर दिया जाए और पद खाली रहें, जिससे सरकार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का दबाव न बने।

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राजनीतिक भूमिका और सरकार का रुख

इस पूरे विवाद ने जल्दी ही एक राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्षी नेता और युवा कार्यकर्ता सक्रिय रूप से प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े दिख रहे हैं। इनमें कार्यकर्ता श्वेता ढुल प्रमुख हैं, जो लगातार सरकार पर नौकरियों के मामले में युवाओं से किए गए वादों से पलटने का आरोप लगा रही हैं।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार 'भर्ती रैलियों' का ढोल पीटती है, लेकिन वास्तव में नौकरियां दिलाने की गंभीर इच्छाशक्ति का अभाव है। दूसरी ओर, हरियाणा सरकार और HPSC का आधिकारिक पक्ष यह है कि शिक्षक भर्ती जैसे संवेदनशील पदों पर केवल योग्य और मेधावी उम्मीदवारों का चयन ही होना चाहिए, और न्यूनतम मानक तय करना इस प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा है। हालांकि, लगातार बढ़ते दबाव के मद्देनजर सरकार ने अभ्यर्थियों की शिकायतों की समीक्षा करने का संकेत दिया है।

भविष्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव

यह विवाद न सिर्फ HPSC की साख के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

  • पहला, इससे प्रदेश की अन्य भर्ती एजेंसियों, जैसे HSSC (हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग), पर भी इसी तरह के मानदंड लागू करने का दबाव बन सकता है।
  • दूसरा, यह मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है, जहां अभ्यर्थी पारदर्शिता और न्यायसंगत मूल्यांकन की मांग कर सकते हैं।
  • तीसरा, इससे हरियाणा के शैक्षणिक माहौल पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता शिक्षण पदों की कमी का कारण बन सकती है।

अभ्यर्थियों की चिंता है कि यदि यही नीति जारी रही, तो प्रतिभाशाली युवाओं को निजी क्षेत्र या अन्य राज्यों की ओर पलायन करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाएगा, जो प्रदेश के विकास के लिए ठीक नहीं होगा। इसी आक्रोश के चलते बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से पंचकूला स्थित एचपीएससी के कार्यालय परिसर और अन्य धरना स्थलों पर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। प्रदर्शनकारी इस मानदंड को तत्काल वापस लेने अथवा इसमें उदारता बरतने की मांग कर रहे हैं।

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Q1: HPSC में 35% और 50% न्यूनतम अंक का मानदंड क्या है?
What is the 35% and 50% minimum marks criteria in HPSC?

A: HPSC ने PGT भर्ती समेत कई परीक्षाओं के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 50% और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 35% न्यूनतम अंक का मानदंड तय किया है।
Answer: HPSC has set a criteria of 50% minimum marks for general category candidates and 35% for reserved category candidates for various exams including PGT recruitment.

Q2: अभ्यर्थी इस मानदंड का विरोध क्यों कर रहे हैं?
Why are candidates protesting against this criteria?

A: अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रश्नपत्र जानबूझकर कठिन बनाए जाते हैं ताकि वे इस कट-ऑफ को पार न कर सकें और पद खाली रहें।
Answer: Candidates allege that question papers are deliberately made difficult so they cannot cross this cut-off and positions remain vacant.

Q3: विरोध प्रदर्शन कहाँ हो रहा है?
Where is the protest happening?

A: मुख्य विरोध प्रदर्शन पंचकूला में HPSC कार्यालय के बाहर और अन्य धरना स्थलों पर हो रहा है।
Answer: Main protests are happening outside HPSC office in Panchkula and other dharna sites.

Q4: सरकार ने इस मामले में क्या कहा है?
What has the government said about this issue?

A: सरकार का कहना है कि यह मानदंड गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी है, लेकिन वह अभ्यर्थियों की शिकायतों की समीक्षा करेगी।
Answer: The government says this criteria is necessary to maintain quality, but it will review candidates' complaints.

Q5: इस विवाद से भविष्य की भर्तियों पर क्या असर पड़ सकता है?
How can this controversy affect future recruitments?

A: इससे भर्ती प्रक्रिया में देरी, अदालती मुकदमे और अन्य भर्ती एजेंसियों पर समान मानदंड लागू करने का दबाव बन सकता है।
Answer: This could lead to delays in recruitment process, court cases, and pressure on other recruitment agencies to implement similar criteria.

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Bijender Kumar

Bijender Kumar

Founder & Writer | Author | लेखक

Bijender Kumar एक passionate लेखक और content creator हैं जिनको 10+ साल का अनुभव है storytelling, creative writing और motivational literature में। वे हमेशा सरल भाषा में ज्ञान और अनुभव साझा करते हैं ताकि हर reader आसानी से समझ सके और inspire हो। उनका focus educational, inspirational और fiction content पर है। Bijender ने अपने लेखन के माध्यम से हजारों लोगों को guide किया है और उन्हें better thinking, creativity और self-growth की ओर motivate किया है। Website: www.shikshanews24.com

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